द्वारका में भरोसे का खौफनाक अंत
यह सनसनीखेज वारदात दिल्ली के द्वारका इलाके की है। मृतक की पहचान 48 वर्षीय अनरूप गुप्ता के रूप में हुई है, जो छत्तीसगढ़ सदन में कैंटीन संचालक थे। बताया जाता है कि उन्हें सोने के जेवर पहनने का शौक था और यही शौक उनके लिए घातक साबित हुआ।
पुलिस के मुताबिक 18 फरवरी 2026 को अनरूप अचानक गायब हो गए थे। 23 फरवरी को परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को स्तब्ध कर दिया।
हनी ट्रैप के जरिए बिछाया गया जाल
तफ्तीश में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी हैप्पी उर्फ सूरज ने अपने साथियों—भूपेंद्र, बलराम, नीरज और राखी—के साथ मिलकर लूट और हत्या की साजिश रची थी। आरोप है कि अनरूप को हनी ट्रैप के माध्यम से फंसाया गया और 18 फरवरी को मटियाला एक्सटेंशन स्थित किराये के घर पर दावत का झांसा देकर बुलाया गया।
वहां पहुंचते ही उनसे आभूषण छीन लिए गए और पैसों की मांग की गई। जब उन्होंने रकम देने से मना किया, तो आरोपियों ने डंडों से हमला किया और चाकू से वार कर उनकी जान ले ली।
सबूत मिटाने के लिए रची गई साजिश
हत्या के बाद आरोपियों ने साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव के टुकड़े कर दिए। उन्हें तीन प्लास्टिक बैग में भरकर मृतक की कार से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए मथुरा की ओर ले जाया गया। बाद में इन बैगों को वृंदावन के समीप यमुना नदी में फेंक दिया गया। कुछ समय बाद नदी से शव के अंग बरामद हुए।
मोबाइल से रची गई भ्रामक कहानी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने संदेह से बचने के लिए अनरूप के मोबाइल फोन का सहारा लिया। परिवार को संदेश भेजा गया कि वह गोवा घूमने गए हैं, जबकि कैंटीन कर्मचारियों को कैंटीन बंद रहने की सूचना दी गई।
ऐसे खुला मामले का राज
द्वारका जिला पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर इस जघन्य कांड का पर्दाफाश किया। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टोल प्लाजा के आंकड़ों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
इस समय चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जबकि एक की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
राजधानी में घटी यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि लालच इंसान को किस हद तक अपराध की अंधी राह पर ले जा सकता है।