मालवांचल मित्र, नीमच: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा केवल एक संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि समाज जागरण का एक व्यापक आंदोलन है, जो देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि देश के लिए जीना और समाज को जोड़ना किसी एक समूह का कार्य नहीं होता, बल्कि यह सामूहिक प्रयास से ही संभव है। यही कारण है कि समाज के हर वर्ग के लोग इस कार्य से जुड़ते चले गए।
भैयाजी जोशी ने समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि समाज का संचालन केवल शासन या राजा के बल पर नहीं चलता। राजा या शासन का कार्य जनता को सुखी और सुरक्षित रखना है, लेकिन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी समाज के प्रबुद्ध और सक्रिय लोगों को ही निभानी होती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून केवल व्यवस्था बनाए रखने का माध्यम है, लेकिन समाज सुधार कानून के माध्यम से संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज सिद्धांतों के विपरीत चलने लगता है, तो वह स्थिति घातक हो जाती है, और यह जागरूकता के अभाव का परिणाम होता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना ही सच्चा तत्वज्ञान है। यदि सिद्धांत जीवन में दिखाई नहीं देते, तो उनका कोई महत्व नहीं रह जाता।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए जागरूकता, सहभागिता और आचरण में सुधार जरूरी है, तभी एक सशक्त और संगठित राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।