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मालवांचल मित्र, नीमच: नीमच नगर पालिका ने विकास का एक नया और अनोखा मॉडल पेश किया है—इतना अनोखा कि शायद इसे समझने के लिए अलग से प्रशिक्षण की जरूरत पड़े। पहले कहा जाता था, “एक व्यक्ति, एक पद”। अब लगता है, यह विचार इतिहास की किसी फाइल में रख दिया गया है, जिस पर धूल की परत जम चुकी है। वर्तमान में नया सिद्धांत है—“एक व्यक्ति, अनेक पद… और काम? वो किसी और का!” नगर में विकास की प्रयोगशाला कुछ इस तरह चल रही है कि पदों का संग्रहालय अधिक सक्रिय दिखता है, जबकि वास्तविक विकास किसी छुट्टी पर गया हुआ कर्मचारी लगता है—जिसका पता न तो फाइलों में है, न मैदान में। एक ही व्यक्ति कई कुर्सियों पर बैठा है, लेकिन कुर्सियाँ शायद खाली ही महसूस कर रही हैं। हाल ही में आयोजित पीआईसी की बैठक ने इस मॉडल को और स्पष्ट कर दिया। बैठक में कुर्सियाँ तो पूरी संख्या में थीं, पर जिम्मेदार लोग कम। एजेंडा भी था, लेकिन उसे पढ़ने और समझने का समय शायद किसी “महत्वपूर्ण व्यस्तता” ने छीन लिया। ऐसा लगा मानो बैठक का उद्देश्य निर्णय लेना नहीं, बल्कि उपस्थिति का एक औपचारिक प्रदर्शन करना भर था। नगर विकास अब प्राथमिकता सूची में “अन्य” श्रेणी में आ चुका है। सड़कें टूटती रहें, नालियाँ जाम हों, सफाई अभियान कागजों में चमकता रहे—कोई फर्क नहीं पड़ता। असली प्राथमिकता है पदों का संतुलन और राजनीतिक समीकरणों का गणित, जिसमें जनता सिर्फ एक सांख्यिकीय संख्या बनकर रह गई है। कर्मचारियों का अनुशासन भी अब एक दिलचस्प विषय बन चुका है। आदेश अब आदेश नहीं, बल्कि सुझाव हैं—जिन्हें मानना या न मानना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है। ऊपर से राजनीतिक संरक्षण ने इस स्वतंत्रता को इतना मजबूत बना दिया है कि नियम अब लचीले रबर बैंड जैसे हो गए हैं—जहाँ जरूरत हो, खींच लो; जहाँ नहीं, छोड़ दो। और इस पूरे तंत्र में पार्षदों के परिजनों का “अनौपचारिक मार्गदर्शन” तो मानो एक नई प्रशासनिक परंपरा की शुरुआत है। यहाँ अनुभव से ज्यादा “संबंध” काम करते हैं, और नियमों से ज्यादा “समझदारी” चलती है—वो भी व्यक्तिगत स्तर की। सबसे रोचक बात यह है कि जवाबदेही का पात्र इस कहानी से पूरी तरह गायब है। जनता इंतजार कर रही है कि कोई तो आएगा, जो विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाएगा। लेकिन यहाँ स्थिति यह है कि ड्राइवर सीट पर कई लोग हैं, और स्टीयरिंग व्हील अब भी अपनी जगह पर अकेला खड़ा है। यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में नीमच नगर पालिका एक केस स्टडी बन सकती है—“कैसे योजनाओं को बिना विरोध के, बिना निर्णय के, और बिना जिम्मेदारी के खुद ही समाप्त किया जाए।” अब जरूरत है कि पीआईसी यह तय करे कि वे बैठक में सिर्फ उपस्थित रहेंगे या वास्तव में कुछ निर्णय भी लेंगे। क्योंकि शहर अब व्यंग्य नहीं, परिणाम चाहता है।
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मालवांचल मित्र, नीमच: नीमच नगर पालिका ने विकास का एक नया और अनोखा मॉडल पेश किया है—इतना अनोखा कि शायद इसे समझने के लिए अलग से प्रशिक्षण की जरूरत पड़े। पहले कहा जाता था, “एक व्यक्ति, एक पद”। अब लगता है, यह विचार इतिहास की किसी फाइल में रख दिया गया है, जिस पर धूल की परत जम चुकी है। वर्तमान में नया सिद्धांत है—“एक व्यक्ति, अनेक पद… और काम? वो किसी और का!”
नगर में विकास की प्रयोगशाला कुछ इस तरह चल रही है कि पदों का संग्रहालय अधिक सक्रिय दिखता है, जबकि वास्तविक विकास किसी छुट्टी पर गया हुआ कर्मचारी लगता है—जिसका पता न तो फाइलों में है, न मैदान में। एक ही व्यक्ति कई कुर्सियों पर बैठा है, लेकिन कुर्सियाँ शायद खाली ही महसूस कर रही हैं।
हाल ही में आयोजित पीआईसी की बैठक ने इस मॉडल को और स्पष्ट कर दिया। बैठक में कुर्सियाँ तो पूरी संख्या में थीं, पर जिम्मेदार लोग कम। एजेंडा भी था, लेकिन उसे पढ़ने और समझने का समय शायद किसी “महत्वपूर्ण व्यस्तता” ने छीन लिया। ऐसा लगा मानो बैठक का उद्देश्य निर्णय लेना नहीं, बल्कि उपस्थिति का एक औपचारिक प्रदर्शन करना भर था।
नगर विकास अब प्राथमिकता सूची में “अन्य” श्रेणी में आ चुका है। सड़कें टूटती रहें, नालियाँ जाम हों, सफाई अभियान कागजों में चमकता रहे—कोई फर्क नहीं पड़ता। असली प्राथमिकता है पदों का संतुलन और राजनीतिक समीकरणों का गणित, जिसमें जनता सिर्फ एक सांख्यिकीय संख्या बनकर रह गई है।
कर्मचारियों का अनुशासन भी अब एक दिलचस्प विषय बन चुका है। आदेश अब आदेश नहीं, बल्कि सुझाव हैं—जिन्हें मानना या न मानना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है। ऊपर से राजनीतिक संरक्षण ने इस स्वतंत्रता को इतना मजबूत बना दिया है कि नियम अब लचीले रबर बैंड जैसे हो गए हैं—जहाँ जरूरत हो, खींच लो; जहाँ नहीं, छोड़ दो।
और इस पूरे तंत्र में पार्षदों के परिजनों का “अनौपचारिक मार्गदर्शन” तो मानो एक नई प्रशासनिक परंपरा की शुरुआत है। यहाँ अनुभव से ज्यादा “संबंध” काम करते हैं, और नियमों से ज्यादा “समझदारी” चलती है—वो भी व्यक्तिगत स्तर की।
सबसे रोचक बात यह है कि जवाबदेही का पात्र इस कहानी से पूरी तरह गायब है। जनता इंतजार कर रही है कि कोई तो आएगा, जो विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाएगा। लेकिन यहाँ स्थिति यह है कि ड्राइवर सीट पर कई लोग हैं, और स्टीयरिंग व्हील अब भी अपनी जगह पर अकेला खड़ा है।
यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में नीमच नगर पालिका एक केस स्टडी बन सकती है—“कैसे योजनाओं को बिना विरोध के, बिना निर्णय के, और बिना जिम्मेदारी के खुद ही समाप्त किया जाए।”
अब जरूरत है कि पीआईसी यह तय करे कि वे बैठक में सिर्फ उपस्थित रहेंगे या वास्तव में कुछ निर्णय भी लेंगे। क्योंकि शहर अब व्यंग्य नहीं, परिणाम चाहता है।
“नीमच में विकास अब ‘एक व्यक्ति, एक पद’ से नहीं, बल्कि ‘एक व्यक्ति, अनेक पद’ से तय होगा…
बस फर्क इतना है कि विकास कहीं दिखेगा नहीं, लेकिन पद जरूर दिखेंगे!”