मालवांचल मित्र , जावद: जिले की जावद तहसील के ग्राम कास्या में प्रशासन द्वारा जारी बेदखली नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है। वर्षों से रह रहे करीब 50 परिवारों के मकानों पर कार्रवाई की तलवार लटकने से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। भाजपा के बूथ अध्यक्ष सचिन पाराशर को नोटिस दिए जाने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है।
बताया जा रहा है कि ग्राम कास्या में कई परिवार लंबे समय से शासकीय भूमि पर पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं। इनमें सचिन पाराशर का परिवार भी शामिल है। प्रशासन ने हाल ही में इन मकानों को ‘अवैध कब्जा’ मानते हुए खाली करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। परिजनों का आरोप है कि यह कार्रवाई अचानक और बिना पर्याप्त कारण के की जा रही है। उनका कहना है कि जब नोटिस लेने से इनकार किया गया, तो प्रशासन ने घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया।
जैसे ही यह मामला सामने आया, राजपूत और ब्राह्मण समाज के लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में एकजुट हो गए। बुधवार को बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी और ग्रामीण नीमच कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान माहौल काफी गर्माया रहा।
प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगें रखीं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन को भूमि खाली करानी है, तो पहले वहां रह रहे परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मकान तोड़े जाने की स्थिति में प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा भी दिया जाए।
पीड़ित पक्ष ने प्रशासन पर राजनीतिक या व्यक्तिगत द्वेष के चलते कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। वहीं समाजजनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बिना पुनर्वास के मकान तोड़े गए, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बढ़ते विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गंभीर हो सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राहत पर टिकी है।