• शहर : नीमच को एयर एम्बुलेंस योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? कौन जिम्मेदार—पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने उठाए सवाल

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    शहर
    शहर   - नीमच[10-08-2026]
  • नीमच | मालवांचल मित्र

    159 मरीजों को मिली एयर एम्बुलेंस सेवा, लेकिन नीमच में अब तक लाभ क्यों नहीं? योजना की पहुंच और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा को लेकर नीमच जिले में अब सवाल खड़े होने लगे हैं। पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने सवाल उठाया है कि प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नीमच जिले के गंभीर मरीजों तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?

    डॉ. जाजू का कहना है कि यदि सरकार ने गंभीर मरीजों को बेहतर और तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एयर एम्बुलेंस जैसी महत्वपूर्ण योजना शुरू की है, तो नीमच जिले के मरीज इस सुविधा से अब तक वंचित क्यों हैं? इसके लिए जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने कितनी पहल की, इसकी समीक्षा होना चाहिए।

    क्या नीमच में गंभीर मरीज नहीं होते?

     

    डॉ. जाजू ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से कई सीधे सवाल किए हैं।

    क्या नीमच जिले में गंभीर सड़क दुर्घटनाएं नहीं होतीं?

    क्या यहां किसी मरीज को हार्ट अटैक नहीं आता?

    क्या स्ट्रोक के मरीज नहीं होते?

    क्या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज नीमच में नहीं हैं?

    और सबसे अहम सवाल—क्या नीमच के ट्रॉमा सेंटर में कभी ऐसे गंभीर मरीज नहीं आते, जिन्हें तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा की जरूरत पड़ती हो?

    अगर इन सभी सवालों का जवाब 'नहीं' है, तो फिर यह जानना जरूरी है कि एयर एम्बुलेंस जैसी सुविधा का लाभ नीमच के गंभीर मरीजों को अब तक क्यों नहीं मिल पाया?

     

    मई 2024 में शुरू हुई थी योजना

    डॉ. जाजू ने मध्यप्रदेश की पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना मई 2024 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस के माध्यम से बड़े शहरों और महानगरों के उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाना है।

    उनके अनुसार, इस सेवा के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जिलों के मरीजों को दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों में उपचार के लिए भेजा गया है। हाल ही में शाजापुर जिले की बोन टीबी से पीड़ित एक मरीज को मुंबई रेफर किए जाने का मामला भी सामने आया, जिसे उज्जैन संभाग में इस सेवा का पहला मामला बताया गया।

    डॉ. जाजू के अनुसार, शुरुआत से अब तक 150 से अधिक गंभीर मरीजों को इस सेवा का लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों में इसका उपयोग बेहद कम या शून्य रहा है।

    आयुष्मान कार्डधारकों के लिए निःशुल्क सेवा

    पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के तहत पात्र गंभीर मरीजों को सरकारी व्यवस्था के माध्यम से एयरलिफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। डॉ. जाजू का कहना है कि आयुष्मान कार्डधारी गंभीर मरीजों और पात्र आपातकालीन मामलों के लिए यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है।

    ऐसे में सवाल यह है कि नीमच जिले के लोगों को इस योजना की जानकारी कितनी दी गई?

    क्या अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए?

    क्या गंभीर मरीजों के परिजनों को एयर एम्बुलेंस की पात्रता और प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है?

    और जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस बुलाने की व्यवस्था वास्तव में कितनी सक्रिय है?

    आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

    डॉ. जाजू ने हिंदुस्तान टाइम्स की भोपाल ब्यूरो प्रमुख श्रुति तोमर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए योजना के संचालन पर भी सवाल उठाए हैं।

    उनके अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत कुल 159 लोगों को एयर एम्बुलेंस से उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया गया, जबकि इनमें से केवल 13 लोगों ने शुल्क का भुगतान किया। बाकी लाभार्थियों के संबंध में रिपोर्ट में आयुष्मान कार्ड तथा अन्य पात्रताओं के आधार पर सरकारी भुगतान की बात सामने आई है।

    रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन 159 लाभार्थियों में 32 लोगों का भाजपा से संबंध था—जिसमें भाजपा नेताओं, उनके रिश्तेदारों अथवा परिचितों के मामले शामिल बताए गए हैं।

    इन दावों को लेकर डॉ. जाजू ने सवाल उठाया है कि सरकारी योजना का लाभ किस आधार पर और किन लोगों तक पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

     

    रीवा संभाग में 44 प्रतिशत लाभार्थी होने का दावा

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 159 एयरलिफ्ट किए गए लोगों में से 70 लोग रीवा संभाग के थे। यानी करीब 44 प्रतिशत लाभार्थी रीवा संभाग से होने का दावा किया गया है।

    रीवा संभाग में रीवा, सीधी, सतना, सिंगरौली और मऊगंज जिले शामिल हैं।

    यही आंकड़ा डॉ. जाजू के सवालों का एक बड़ा आधार है। उनका कहना है कि यदि प्रदेश के अन्य जिलों में भी गंभीर मरीज मौजूद हैं, तो फिर एयर एम्बुलेंस सेवा का क्षेत्रवार उपयोग इतना असमान क्यों दिखाई देता है?

    भाजपा नेताओं और प्रभावशाली लोगों के मामलों का भी जिक्र

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट में सामने आए कुछ मामलों का भी उल्लेख किया।

    रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मंत्री एवं विधायक गौरीशंकर बिसेन को सीने में दर्द होने पर पीएम श्री एयर एम्बुलेंस के माध्यम से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल ले जाया गया। इसी तरह गरोठ-भानपुरा विधायक चंदरसिंह सिसोदिया के बेटे को अहमदाबाद एयरलिफ्ट किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

    डॉ. जाजू के अनुसार, दोनों मामलों में शुल्क नहीं लिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, इन मामलों में संबंधित लोगों के अपने बयान और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

    रिपोर्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पूर्व शिक्षक घनश्याम त्रिपाठी से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। इसी प्रकार सतना के व्यवसायी राकेन्द्र कुमार मकिन को रीवा से दिल्ली एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराए जाने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।

     

    बुकिंग हुई, यात्रा नहीं हुई—फिर भी भुगतान?

    डॉ. जाजू ने एयर एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया है।

    उनके अनुसार, रिपोर्ट में रीवा के व्यवसायियों मधु वाधवानी और उमेश गुप्ता तथा पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती से जुड़े ऐसे मामलों का उल्लेख है, जिनमें एयर एम्बुलेंस बुक की गई, लेकिन यात्रा नहीं हुई।

    इसके बावजूद कथित तौर पर सेवा प्रदाता कंपनी को सरकार की ओर से भुगतान किया गया।

    इस संबंध में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि एक बार एयर एम्बुलेंस का आदेश दिए जाने के बाद यात्रा न होने पर भी शुल्क देना पड़ता है।

    दूसरी ओर, रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोगों ने एयर एम्बुलेंस में तकनीकी समस्याओं और उपकरणों की स्थिति को यात्रा नहीं करने की वजह बताया।

    यदि ये दावे सही हैं, तो यहां एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है—सरकार जिस सेवा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, उसकी गुणवत्ता और उपकरणों की नियमित जांच कौन करता है?

    159 मरीजों पर करोड़ों का खर्च?

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 159 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से लगभग 36 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई।

    इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि योजना का लाभ प्रदेश के सभी जरूरतमंद जिलों तक समान रूप से क्यों नहीं पहुंचा?

    क्या जिलेवार आंकड़े सार्वजनिक किए गए?

    किस जिले से कितने मरीज एयरलिफ्ट किए गए?

    किस आधार पर मरीजों को पात्र माना गया?

    कितना भुगतान किस मरीज के लिए किया गया?

    और कितने मामलों में मरीज या उसके परिवार से राशि ली गई?

    इन सभी सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।

    'पीएम श्री' या 'भाजपा श्री'—डॉ. जाजू का तंज

    योजना के क्षेत्रीय इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए डॉ. जाजू ने राजनीतिक अंदाज में तंज भी कसा है कि यदि इसका लाभ इतनी बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं, उनके रिश्तेदारों और परिचितों तक ही पहुंचना है तो फिर इस योजना का नाम 'पीएम श्री एयर एम्बुलेंस' के बजाय 'भाजपा श्री एयर एम्बुलेंस' या 'रीवा/शुक्ला एयर एम्बुलेंस' रख देना चाहिए।

    हालांकि, यह डॉ. जाजू की राजनीतिक टिप्पणी है और इसके पीछे बताए गए आंकड़ों तथा आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि आवश्यक है।

    नीमच के लिए सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?

    डॉ. जाजू ने कहा कि सवाल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि नीमच के गंभीर मरीजों के अधिकार का है।

    यदि कोई मरीज सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होता है, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का शिकार होता है अथवा ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जिसके लिए तत्काल बड़े चिकित्सा संस्थान में उपचार की जरूरत है, तो उसे उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

    इसके लिए केवल योजना बना देना पर्याप्त नहीं है। योजना की जानकारी, पात्रता की पहचान, रेफरल प्रक्रिया और समय पर एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराना—इन सभी स्तरों पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

    डॉ. जाजू ने मांगी जवाबदेही

    पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने मांग की है कि नीमच जिले में पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाए।

    उन्होंने सवाल उठाया कि—

    • नीमच से अब तक कितने गंभीर मरीजों को एयर एम्बुलेंस से बाहर भेजा गया?
    • कितने मरीज इस सुविधा के लिए पात्र थे?
    • कितने मामलों में एयर एम्बुलेंस की मांग की गई?
    • कितने आवेदन अस्वीकार हुए और क्यों?
    • स्वास्थ्य विभाग ने इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कदम उठाए?
    • जिले के सरकारी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटर में इसकी प्रक्रिया की जानकारी कितने कर्मचारियों को है?
    • जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय है?

    इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।

    योजना कागज पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए

    डॉ. जाजू ने कहा कि सरकार की किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता उसके प्रचार से नहीं, बल्कि जरूरत के समय मरीज तक पहुंचने वाली सुविधा से तय होती है।

    एयर एम्बुलेंस जैसी सुविधा गंभीर मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है। ऐसे में यदि योजना मौजूद है, बजट खर्च हो रहा है और प्रदेश के कुछ जिलों में मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है, तो नीमच जैसे जिले में इसकी पहुंच कमजोर क्यों है—इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को देना चाहिए।

    सवाल सीधा है—योजना बनी, प्रचार हुआ और करोड़ों रुपये खर्च हुए… लेकिन जब नीमच के किसी गंभीर मरीज को इसकी जरूरत पड़े, तब एयर एम्बुलेंस कहां है?

    जवाबदेही तय होनी चाहिए।



  • शहर : नीमच को एयर एम्बुलेंस योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? कौन जिम्मेदार—पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने उठाए सवाल

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
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    शहर   - नीमच[10-08-2026]

    नीमच | मालवांचल मित्र

    159 मरीजों को मिली एयर एम्बुलेंस सेवा, लेकिन नीमच में अब तक लाभ क्यों नहीं? योजना की पहुंच और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा को लेकर नीमच जिले में अब सवाल खड़े होने लगे हैं। पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने सवाल उठाया है कि प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नीमच जिले के गंभीर मरीजों तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?

    डॉ. जाजू का कहना है कि यदि सरकार ने गंभीर मरीजों को बेहतर और तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एयर एम्बुलेंस जैसी महत्वपूर्ण योजना शुरू की है, तो नीमच जिले के मरीज इस सुविधा से अब तक वंचित क्यों हैं? इसके लिए जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने कितनी पहल की, इसकी समीक्षा होना चाहिए।

    क्या नीमच में गंभीर मरीज नहीं होते?

     

    डॉ. जाजू ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से कई सीधे सवाल किए हैं।

    क्या नीमच जिले में गंभीर सड़क दुर्घटनाएं नहीं होतीं?

    क्या यहां किसी मरीज को हार्ट अटैक नहीं आता?

    क्या स्ट्रोक के मरीज नहीं होते?

    क्या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज नीमच में नहीं हैं?

    और सबसे अहम सवाल—क्या नीमच के ट्रॉमा सेंटर में कभी ऐसे गंभीर मरीज नहीं आते, जिन्हें तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा की जरूरत पड़ती हो?

    अगर इन सभी सवालों का जवाब 'नहीं' है, तो फिर यह जानना जरूरी है कि एयर एम्बुलेंस जैसी सुविधा का लाभ नीमच के गंभीर मरीजों को अब तक क्यों नहीं मिल पाया?

     

    मई 2024 में शुरू हुई थी योजना

    डॉ. जाजू ने मध्यप्रदेश की पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना मई 2024 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस के माध्यम से बड़े शहरों और महानगरों के उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाना है।

    उनके अनुसार, इस सेवा के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जिलों के मरीजों को दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों में उपचार के लिए भेजा गया है। हाल ही में शाजापुर जिले की बोन टीबी से पीड़ित एक मरीज को मुंबई रेफर किए जाने का मामला भी सामने आया, जिसे उज्जैन संभाग में इस सेवा का पहला मामला बताया गया।

    डॉ. जाजू के अनुसार, शुरुआत से अब तक 150 से अधिक गंभीर मरीजों को इस सेवा का लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों में इसका उपयोग बेहद कम या शून्य रहा है।

    आयुष्मान कार्डधारकों के लिए निःशुल्क सेवा

    पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के तहत पात्र गंभीर मरीजों को सरकारी व्यवस्था के माध्यम से एयरलिफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। डॉ. जाजू का कहना है कि आयुष्मान कार्डधारी गंभीर मरीजों और पात्र आपातकालीन मामलों के लिए यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है।

    ऐसे में सवाल यह है कि नीमच जिले के लोगों को इस योजना की जानकारी कितनी दी गई?

    क्या अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए?

    क्या गंभीर मरीजों के परिजनों को एयर एम्बुलेंस की पात्रता और प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है?

    और जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस बुलाने की व्यवस्था वास्तव में कितनी सक्रिय है?

    आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

    डॉ. जाजू ने हिंदुस्तान टाइम्स की भोपाल ब्यूरो प्रमुख श्रुति तोमर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए योजना के संचालन पर भी सवाल उठाए हैं।

    उनके अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत कुल 159 लोगों को एयर एम्बुलेंस से उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया गया, जबकि इनमें से केवल 13 लोगों ने शुल्क का भुगतान किया। बाकी लाभार्थियों के संबंध में रिपोर्ट में आयुष्मान कार्ड तथा अन्य पात्रताओं के आधार पर सरकारी भुगतान की बात सामने आई है।

    रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन 159 लाभार्थियों में 32 लोगों का भाजपा से संबंध था—जिसमें भाजपा नेताओं, उनके रिश्तेदारों अथवा परिचितों के मामले शामिल बताए गए हैं।

    इन दावों को लेकर डॉ. जाजू ने सवाल उठाया है कि सरकारी योजना का लाभ किस आधार पर और किन लोगों तक पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

     

    रीवा संभाग में 44 प्रतिशत लाभार्थी होने का दावा

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 159 एयरलिफ्ट किए गए लोगों में से 70 लोग रीवा संभाग के थे। यानी करीब 44 प्रतिशत लाभार्थी रीवा संभाग से होने का दावा किया गया है।

    रीवा संभाग में रीवा, सीधी, सतना, सिंगरौली और मऊगंज जिले शामिल हैं।

    यही आंकड़ा डॉ. जाजू के सवालों का एक बड़ा आधार है। उनका कहना है कि यदि प्रदेश के अन्य जिलों में भी गंभीर मरीज मौजूद हैं, तो फिर एयर एम्बुलेंस सेवा का क्षेत्रवार उपयोग इतना असमान क्यों दिखाई देता है?

    भाजपा नेताओं और प्रभावशाली लोगों के मामलों का भी जिक्र

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट में सामने आए कुछ मामलों का भी उल्लेख किया।

    रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मंत्री एवं विधायक गौरीशंकर बिसेन को सीने में दर्द होने पर पीएम श्री एयर एम्बुलेंस के माध्यम से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल ले जाया गया। इसी तरह गरोठ-भानपुरा विधायक चंदरसिंह सिसोदिया के बेटे को अहमदाबाद एयरलिफ्ट किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

    डॉ. जाजू के अनुसार, दोनों मामलों में शुल्क नहीं लिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, इन मामलों में संबंधित लोगों के अपने बयान और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

    रिपोर्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पूर्व शिक्षक घनश्याम त्रिपाठी से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। इसी प्रकार सतना के व्यवसायी राकेन्द्र कुमार मकिन को रीवा से दिल्ली एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराए जाने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।

     

    बुकिंग हुई, यात्रा नहीं हुई—फिर भी भुगतान?

    डॉ. जाजू ने एयर एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया है।

    उनके अनुसार, रिपोर्ट में रीवा के व्यवसायियों मधु वाधवानी और उमेश गुप्ता तथा पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती से जुड़े ऐसे मामलों का उल्लेख है, जिनमें एयर एम्बुलेंस बुक की गई, लेकिन यात्रा नहीं हुई।

    इसके बावजूद कथित तौर पर सेवा प्रदाता कंपनी को सरकार की ओर से भुगतान किया गया।

    इस संबंध में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि एक बार एयर एम्बुलेंस का आदेश दिए जाने के बाद यात्रा न होने पर भी शुल्क देना पड़ता है।

    दूसरी ओर, रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोगों ने एयर एम्बुलेंस में तकनीकी समस्याओं और उपकरणों की स्थिति को यात्रा नहीं करने की वजह बताया।

    यदि ये दावे सही हैं, तो यहां एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है—सरकार जिस सेवा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, उसकी गुणवत्ता और उपकरणों की नियमित जांच कौन करता है?

    159 मरीजों पर करोड़ों का खर्च?

    डॉ. जाजू ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 159 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से लगभग 36 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई।

    इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि योजना का लाभ प्रदेश के सभी जरूरतमंद जिलों तक समान रूप से क्यों नहीं पहुंचा?

    क्या जिलेवार आंकड़े सार्वजनिक किए गए?

    किस जिले से कितने मरीज एयरलिफ्ट किए गए?

    किस आधार पर मरीजों को पात्र माना गया?

    कितना भुगतान किस मरीज के लिए किया गया?

    और कितने मामलों में मरीज या उसके परिवार से राशि ली गई?

    इन सभी सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।

    'पीएम श्री' या 'भाजपा श्री'—डॉ. जाजू का तंज

    योजना के क्षेत्रीय इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए डॉ. जाजू ने राजनीतिक अंदाज में तंज भी कसा है कि यदि इसका लाभ इतनी बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं, उनके रिश्तेदारों और परिचितों तक ही पहुंचना है तो फिर इस योजना का नाम 'पीएम श्री एयर एम्बुलेंस' के बजाय 'भाजपा श्री एयर एम्बुलेंस' या 'रीवा/शुक्ला एयर एम्बुलेंस' रख देना चाहिए।

    हालांकि, यह डॉ. जाजू की राजनीतिक टिप्पणी है और इसके पीछे बताए गए आंकड़ों तथा आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि आवश्यक है।

    नीमच के लिए सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?

    डॉ. जाजू ने कहा कि सवाल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि नीमच के गंभीर मरीजों के अधिकार का है।

    यदि कोई मरीज सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होता है, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का शिकार होता है अथवा ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जिसके लिए तत्काल बड़े चिकित्सा संस्थान में उपचार की जरूरत है, तो उसे उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

    इसके लिए केवल योजना बना देना पर्याप्त नहीं है। योजना की जानकारी, पात्रता की पहचान, रेफरल प्रक्रिया और समय पर एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराना—इन सभी स्तरों पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

    डॉ. जाजू ने मांगी जवाबदेही

    पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने मांग की है कि नीमच जिले में पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाए।

    उन्होंने सवाल उठाया कि—

    • नीमच से अब तक कितने गंभीर मरीजों को एयर एम्बुलेंस से बाहर भेजा गया?
    • कितने मरीज इस सुविधा के लिए पात्र थे?
    • कितने मामलों में एयर एम्बुलेंस की मांग की गई?
    • कितने आवेदन अस्वीकार हुए और क्यों?
    • स्वास्थ्य विभाग ने इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कदम उठाए?
    • जिले के सरकारी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटर में इसकी प्रक्रिया की जानकारी कितने कर्मचारियों को है?
    • जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय है?

    इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।

    योजना कागज पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए

    डॉ. जाजू ने कहा कि सरकार की किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता उसके प्रचार से नहीं, बल्कि जरूरत के समय मरीज तक पहुंचने वाली सुविधा से तय होती है।

    एयर एम्बुलेंस जैसी सुविधा गंभीर मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है। ऐसे में यदि योजना मौजूद है, बजट खर्च हो रहा है और प्रदेश के कुछ जिलों में मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है, तो नीमच जैसे जिले में इसकी पहुंच कमजोर क्यों है—इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को देना चाहिए।

    सवाल सीधा है—योजना बनी, प्रचार हुआ और करोड़ों रुपये खर्च हुए… लेकिन जब नीमच के किसी गंभीर मरीज को इसकी जरूरत पड़े, तब एयर एम्बुलेंस कहां है?

    जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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