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चीताखेड़ा | मालवांचल मित्र अक्सर यह कहा जाता है कि आज के दौर में ईमानदारी ढूंढने से भी नहीं मिलती। लेकिन चीताखेड़ा के एक युवक ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उसने सड़क पर मिली नगदी और बैंक पासबुक से भरी थैली को अपने पास रखने के बजाय उसके असली मालिक तक पहुंचाकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत और ईमानदारी आज भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं। घटना 3 अगस्त 2026, सोमवार की शाम करीब 5 बजे की है। जीरन-चीताखेड़ा मार्ग पर मुक्तिधाम के पास चीताखेड़ा निवासी नवनीत (सेन) परमार को सड़क किनारे एक थैली मिली। थैली खोलकर देखने पर उसमें ₹4300 नकद और बैंक ऑफ बड़ौदा की एक पासबुक मिली। पासबुक में खाताधारक का नाम गोपाल कुंवर राजपूत दर्ज था, जबकि शाखा का पता भवानी मार्केट, पुस्तक बाजार, नीमच लिखा हुआ था।
नवनीत परमार ने बिना किसी लालच के थैली सुरक्षित रखी और उसके असली मालिक की तलाश शुरू कर दी। जैसे ही सही व्यक्ति की पहचान हुई, पूरी पारदर्शिता के साथ सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में ग्रामीणों और उपस्थित लोगों के सामने थैली में रखे ₹4300 तथा सभी दस्तावेज उनके वास्तविक मालिक को सौंप दिए गए। आज जब छोटी-छोटी बातों पर भरोसा टूटता दिखाई देता है और सोशल मीडिया पर ठगी की खबरें ज्यादा सुर्खियां बटोरती हैं, ऐसे समय में नवनीत परमार का यह कदम समाज के लिए सकारात्मक संदेश बनकर सामने आया है। हल्का-सा व्यंग्य यही है कि जहां कुछ लोग दूसरों की जेब पर नजर रखते हैं, वहीं कुछ लोग दूसरों का खोया हुआ सामान लौटाकर दिल जीत लेते हैं।
ग्रामीणों ने नवनीत परमार की ईमानदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं और नई पीढ़ी को उनसे सीख लेनी चाहिए।
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चीताखेड़ा | मालवांचल मित्र
अक्सर यह कहा जाता है कि आज के दौर में ईमानदारी ढूंढने से भी नहीं मिलती। लेकिन चीताखेड़ा के एक युवक ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उसने सड़क पर मिली नगदी और बैंक पासबुक से भरी थैली को अपने पास रखने के बजाय उसके असली मालिक तक पहुंचाकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत और ईमानदारी आज भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
घटना 3 अगस्त 2026, सोमवार की शाम करीब 5 बजे की है। जीरन-चीताखेड़ा मार्ग पर मुक्तिधाम के पास चीताखेड़ा निवासी नवनीत (सेन) परमार को सड़क किनारे एक थैली मिली। थैली खोलकर देखने पर उसमें ₹4300 नकद और बैंक ऑफ बड़ौदा की एक पासबुक मिली। पासबुक में खाताधारक का नाम गोपाल कुंवर राजपूत दर्ज था, जबकि शाखा का पता भवानी मार्केट, पुस्तक बाजार, नीमच लिखा हुआ था।

नवनीत परमार ने बिना किसी लालच के थैली सुरक्षित रखी और उसके असली मालिक की तलाश शुरू कर दी। जैसे ही सही व्यक्ति की पहचान हुई, पूरी पारदर्शिता के साथ सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में ग्रामीणों और उपस्थित लोगों के सामने थैली में रखे ₹4300 तथा सभी दस्तावेज उनके वास्तविक मालिक को सौंप दिए गए।
आज जब छोटी-छोटी बातों पर भरोसा टूटता दिखाई देता है और सोशल मीडिया पर ठगी की खबरें ज्यादा सुर्खियां बटोरती हैं, ऐसे समय में नवनीत परमार का यह कदम समाज के लिए सकारात्मक संदेश बनकर सामने आया है। हल्का-सा व्यंग्य यही है कि जहां कुछ लोग दूसरों की जेब पर नजर रखते हैं, वहीं कुछ लोग दूसरों का खोया हुआ सामान लौटाकर दिल जीत लेते हैं।

ग्रामीणों ने नवनीत परमार की ईमानदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं और नई पीढ़ी को उनसे सीख लेनी चाहिए।
ईमानदारी की कीमत पैसों से नहीं, विश्वास से तय होती है। चीताखेड़ा के नवनीत सेन परमार ने ₹4300 लौटाकर सिर्फ एक थैली नहीं, बल्कि समाज का भरोसा भी उसके असली मालिक तक पहुंचा दिया।