मालवांचल मित्र, नीमच: Today in History | Bharat Ratna Nanaji Deshmukh Birth Anniversary | RSS BAN News in Hindi
24 फरवरी भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1920 में देश के प्रख्यात समाजसेवी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक नानाजी देशमुख का जन्म हुआ था। वहीं 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाया गया प्रतिबंध इसी दिन प्रभावी हुआ। आइए जानते हैं इन दोनों ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विस्तार से।
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नानाजी देशमुख: समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण का पर्याय
24 फरवरी 1920 को जन्मे Nanaji Deshmukh भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए जीवनभर कार्य करते रहे।
नानाजी देशमुख ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन सत्ता से अधिक उन्होंने समाजसेवा को प्राथमिकता दी। आपातकाल के दौर में वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।
उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं चलाईं। चित्रकूट क्षेत्र में उनके द्वारा शुरू किए गए विकास मॉडल को आज भी एक आदर्श ग्रामीण विकास मॉडल माना जाता है। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
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1948: RSS पर प्रतिबंध और राजनीतिक हलचल
30 जनवरी 1948 को Mahatma Gandhi की हत्या के बाद देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल था। इसी परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार ने Rashtriya Swayamsevak Sangh पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया, जो 24 फरवरी 1948 से प्रभावी हुआ।
सरकार का आरोप था कि संगठन की विचारधारा और गतिविधियां राष्ट्र की एकता के लिए खतरा बन सकती हैं। हालांकि बाद में जांच और वार्ताओं के पश्चात जुलाई 1949 में यह प्रतिबंध हटा लिया गया। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति और वैचारिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया।
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इतिहास से वर्तमान तक
24 फरवरी की ये दोनों घटनाएं भारतीय लोकतंत्र, वैचारिक बहस और सामाजिक परिवर्तन की यात्रा को दर्शाती हैं। एक ओर नानाजी देशमुख जैसे व्यक्तित्व ने समाज सेवा के जरिए राष्ट्र निर्माण की मिसाल पेश की, तो दूसरी ओर 1948 की घटना ने स्वतंत्र भारत की राजनीति में संगठन और सरकार के संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए।
इतिहास के पन्नों में दर्ज ये घटनाएं आज भी हमें विचार करने और सीखने का अवसर देती हैं।