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मालवांचल मित्र, नीमच: भारतीय जनमानस में सोने और चांदी को लेकर सदैव एक आकर्षण का भाव रहा है। खासकर भारतीय महिलाओं को सोने और चांदी के आभूषणों से जैसा लगाव रहा है वैसा दुनिया के अन्य किसी देश में दुर्लभ ही होगा। सामान्य से सामान्य भारतीय अपनी बचत का एक हिस्सा सोने - चांदी के आभूषणों में ही निवेश करता रहा है। विश्व के कुल सोने का 25% भारतीय परिवारों के पास है। लेकिन पिछले कुछ समय से सोने और चांदी के व्यापार में वैश्विक स्तर पर सट्टेबाजी हावी होती जा रही है। सोने चांदी के वायदा व्यापार ने इस सट्टेबाजी को अपने चरम पर पहुंचा दिया है। 6 महीने पहले ₹100000 प्रति किलो बिकने वाली चांदी जनवरी 2026 में ₹400000 प्रति किलो तक पहुंच गई और फिर तीन ही दिनों में वापस ₹ 250000 प्रति किलो तक लुढ़क गई। वही सोना भी 6 माह पहले के ₹100000 प्रति 10 ग्राम से जनवरी 2026 में ₹190000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचकर वर्तमान में ₹155000 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इस प्रकार की तेजी मंदी से जहां सराफा व्यापार बुरी तरह चरमरा गया है, वहीं आम आदमी अपने वैवाहिक आयोजनों के लिए चाह कर भी इतना महंगा सोना-चांदी नहीं खरीद पा रहा है।पहले जहां सोने चांदी का उपयोग मुख्यतः आभूषण बनाने के लिए ही होता था, वहीं अब यह सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जा रहा है। जिससे लाखों लोग मुनाफा कमाने के लिए इसकी खरीदी बिक्री कर रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों की सट्टेबाजी के कारण कई लोग अपने जीवन भर की जमा पूंजी से हाथ धो बैठे हैं। इस असमंजस भरे व्यापार ने सोने और चांदी को भारतीय आम आदमी से दूर कर दिया है। इतना महंगा सोना - चांदी खरीदना अब गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कठिन होता जा रहा है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सरकारों को चाहिए कि सोने चांदी पर हावी सट्टा व्यापार को नियंत्रित कर इन दोनों कीमती धातुओं को एक संतुलित कीमत पर लाने का प्रयास करें ताकि इनकी चमक बरकरार रहे। |
मालवांचल मित्र, नीमच: भारतीय जनमानस में सोने और चांदी को लेकर सदैव एक आकर्षण का भाव रहा है। खासकर भारतीय महिलाओं को सोने और चांदी के आभूषणों से जैसा लगाव रहा है वैसा दुनिया के अन्य किसी देश में दुर्लभ ही होगा। सामान्य से सामान्य भारतीय अपनी बचत का एक हिस्सा सोने - चांदी के आभूषणों में ही निवेश करता रहा है। विश्व के कुल सोने का 25% भारतीय परिवारों के पास है। लेकिन पिछले कुछ समय से सोने और चांदी के व्यापार में वैश्विक स्तर पर सट्टेबाजी हावी होती जा रही है। सोने चांदी के वायदा व्यापार ने इस सट्टेबाजी को अपने चरम पर पहुंचा दिया है। 6 महीने पहले ₹100000 प्रति किलो बिकने वाली चांदी जनवरी 2026 में ₹400000 प्रति किलो तक पहुंच गई और फिर तीन ही दिनों में वापस ₹ 250000 प्रति किलो तक लुढ़क गई। वही सोना भी 6 माह पहले के ₹100000 प्रति 10 ग्राम से जनवरी 2026 में ₹190000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचकर वर्तमान में ₹155000 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इस प्रकार की तेजी मंदी से जहां सराफा व्यापार बुरी तरह चरमरा गया है, वहीं आम आदमी अपने वैवाहिक आयोजनों के लिए चाह कर भी इतना महंगा सोना-चांदी नहीं खरीद पा रहा है।पहले जहां सोने चांदी का उपयोग मुख्यतः आभूषण बनाने के लिए ही होता था, वहीं अब यह सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जा रहा है। जिससे लाखों लोग मुनाफा कमाने के लिए इसकी खरीदी बिक्री कर रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों की सट्टेबाजी के कारण कई लोग अपने जीवन भर की जमा पूंजी से हाथ धो बैठे हैं। इस असमंजस भरे व्यापार ने सोने और चांदी को भारतीय आम आदमी से दूर कर दिया है। इतना महंगा सोना - चांदी खरीदना अब गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कठिन होता जा रहा है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सरकारों को चाहिए कि सोने चांदी पर हावी सट्टा व्यापार को नियंत्रित कर इन दोनों कीमती धातुओं को एक संतुलित कीमत पर लाने का प्रयास करें ताकि इनकी चमक बरकरार रहे।