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नई दिल्ली/मुंबई । मालवांचल मित्र जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठना और फिर विदेश भाग जाना... सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन महाराष्ट्र में सामने आया 88 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले का मामला बिल्कुल ऐसा ही है। इस मामले में आरोपी दंपति अविनाश राठौड़ और विशाखा राठौड़ ने कथित तौर पर निवेशकों को हर महीने तय (फिक्स्ड) रिटर्न का लालच दिया। लोगों ने भरोसा किया, अपनी मेहनत की कमाई निवेश की, लेकिन आरोप है कि वादे केवल कागजों तक सीमित रहे और पैसा दूसरी जगहों पर ट्रांसफर कर दिया गया। भरोसे का कारोबार, लेकिन निकला बड़ा खेल जांच एजेंसियों के अनुसार, दंपति ने कई निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए। शुरुआत में आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर निवेशकों का विश्वास जीता गया। लेकिन बाद में कथित तौर पर यही रकम अलग-अलग बैंक खातों और डीमैट खातों के जरिए इधर-उधर कर दी गई। जांच में सामने आया कि इस पूरे कथित घोटाले की राशि करीब 88 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आरोप है कि निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया।
देश छोड़कर UAE पहुंचे जब मामले की जांच तेज हुई तो आरोप है कि अविनाश और विशाखा राठौड़ देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) चले गए। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ 4 जून 2026 को इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। यह नोटिस उन आरोपियों के लिए जारी किया जाता है, जिनकी तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही हो ताकि उन्हें गिरफ्तार कर संबंधित देश को सौंपा जा सके। पहले पति, अब पत्नी भी भारत लाई गई CBI, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समन्वय से पहले अविनाश राठौड़ को UAE से हिरासत में लेकर 23 जुलाई को भारत प्रत्यर्पित किया गया। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद 3 अगस्त को विशाखा राठौड़ को भी UAE से भारत लाया गया। पुणे पहुंचने पर उसे महाराष्ट्र पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब दोनों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।
जांच अभी जारी मुंबई पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे, पैसा किन-किन खातों में भेजा गया और कितने निवेशक इसकी चपेट में आए। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि "गारंटीड मोटा मुनाफा" सुनने में जितना आकर्षक लगता है, कई बार उतना ही जोखिम भरा भी साबित होता है। किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, कंपनी की विश्वसनीयता और नियामकीय मंजूरी की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है। क्योंकि आसान कमाई के सपने कभी-कभी जीवनभर की बचत भी साथ ले जाते हैं। |
नई दिल्ली/मुंबई । मालवांचल मित्र
जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठना और फिर विदेश भाग जाना... सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन महाराष्ट्र में सामने आया 88 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले का मामला बिल्कुल ऐसा ही है।
इस मामले में आरोपी दंपति अविनाश राठौड़ और विशाखा राठौड़ ने कथित तौर पर निवेशकों को हर महीने तय (फिक्स्ड) रिटर्न का लालच दिया। लोगों ने भरोसा किया, अपनी मेहनत की कमाई निवेश की, लेकिन आरोप है कि वादे केवल कागजों तक सीमित रहे और पैसा दूसरी जगहों पर ट्रांसफर कर दिया गया।
भरोसे का कारोबार, लेकिन निकला बड़ा खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, दंपति ने कई निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए। शुरुआत में आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर निवेशकों का विश्वास जीता गया। लेकिन बाद में कथित तौर पर यही रकम अलग-अलग बैंक खातों और डीमैट खातों के जरिए इधर-उधर कर दी गई।
जांच में सामने आया कि इस पूरे कथित घोटाले की राशि करीब 88 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आरोप है कि निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया।

देश छोड़कर UAE पहुंचे
जब मामले की जांच तेज हुई तो आरोप है कि अविनाश और विशाखा राठौड़ देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) चले गए। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ 4 जून 2026 को इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। यह नोटिस उन आरोपियों के लिए जारी किया जाता है, जिनकी तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही हो ताकि उन्हें गिरफ्तार कर संबंधित देश को सौंपा जा सके।
पहले पति, अब पत्नी भी भारत लाई गई
CBI, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समन्वय से पहले अविनाश राठौड़ को UAE से हिरासत में लेकर 23 जुलाई को भारत प्रत्यर्पित किया गया। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसके बाद 3 अगस्त को विशाखा राठौड़ को भी UAE से भारत लाया गया। पुणे पहुंचने पर उसे महाराष्ट्र पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब दोनों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

जांच अभी जारी
मुंबई पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे, पैसा किन-किन खातों में भेजा गया और कितने निवेशक इसकी चपेट में आए।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि "गारंटीड मोटा मुनाफा" सुनने में जितना आकर्षक लगता है, कई बार उतना ही जोखिम भरा भी साबित होता है। किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, कंपनी की विश्वसनीयता और नियामकीय मंजूरी की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है। क्योंकि आसान कमाई के सपने कभी-कभी जीवनभर की बचत भी साथ ले जाते हैं।