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मालवांचल मित्र, विशेष रिपोर्ट: Today in History | Death Anniversary | Lata Mangeshkar News In Hindi आज भारतीय संगीत जगत की सबसे महान हस्तियों में से एक, स्वर कोकिला लता मंगेशकर की पुण्यतिथि है। एक साधारण शुरुआत, असाधारण सफ़र लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर स्वयं एक प्रसिद्ध रंगकर्मी और गायक थे। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद लता जी पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी आ गई। महज़ 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिल्मों में गाना शुरू किया। शुरुआती दौर संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनकी आवाज़ की मिठास और साधना ने जल्द ही उन्हें अलग पहचान दिला दी। भारतीय सिनेमा की आत्मा बनी आवाज़ लता मंगेशकर ने अपने करियर में 36 से अधिक भाषाओं में गाने गाए। “लग जा गले”, संगीतकारों और पीढ़ियों की पहली पसंद नौशाद, एस.डी. बर्मन, मदन मोहन, लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल से लेकर ए.आर. रहमान तक — उन्होंने लगभग 50,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सम्मान और पहचान लता मंगेशकर को भारत सरकार ने लेकिन उनका सबसे बड़ा सम्मान अंतिम विदाई, अमर विरासत 06 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर ने इस दुनिया को अलविदा कहा। आज भी रेडियो, मोबाइल और मंचों पर आज की तारीख हमें याद दिलाती है मालवांचल मित्र श्रद्धांजलि। |
मालवांचल मित्र, विशेष रिपोर्ट: Today in History | Death Anniversary | Lata Mangeshkar News In Hindi
आज भारतीय संगीत जगत की सबसे महान हस्तियों में से एक, स्वर कोकिला लता मंगेशकर की पुण्यतिथि है।
06 फरवरी 2022 को यह अमर आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई, लेकिन उनके सुर आज भी हर पीढ़ी के दिलों में गूंज रहे हैं।
एक साधारण शुरुआत, असाधारण सफ़र
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर स्वयं एक प्रसिद्ध रंगकर्मी और गायक थे। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद लता जी पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी आ गई।
महज़ 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिल्मों में गाना शुरू किया। शुरुआती दौर संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनकी आवाज़ की मिठास और साधना ने जल्द ही उन्हें अलग पहचान दिला दी।
भारतीय सिनेमा की आत्मा बनी आवाज़
लता मंगेशकर ने अपने करियर में 36 से अधिक भाषाओं में गाने गाए।
उन्होंने लता नहीं, बल्कि हर दौर की नायिका की आवाज़ बनकर परदे पर जान फूंकी।
“लग जा गले”,
“ए मेरे वतन के लोगों”,
“प्यार किया तो डरना क्या”,
“तेरे बिना ज़िंदगी से कोई” —
ये सिर्फ़ गाने नहीं, भावनाओं की धरोहर हैं।
संगीतकारों और पीढ़ियों की पहली पसंद
नौशाद, एस.डी. बर्मन, मदन मोहन, लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल से लेकर ए.आर. रहमान तक —
हर बड़े संगीतकार की पहली पसंद लता मंगेशकर ही रहीं।
उन्होंने लगभग 50,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
सम्मान और पहचान
लता मंगेशकर को भारत सरकार ने
भारत रत्न,
पद्म विभूषण,
पद्म भूषण और
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।
लेकिन उनका सबसे बड़ा सम्मान
जनता का प्यार और सम्मान था।
अंतिम विदाई, अमर विरासत
06 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर ने इस दुनिया को अलविदा कहा।
पूरा देश शोक में डूब गया,
लेकिन उनकी आवाज़ कभी नहीं मरी।
आज भी रेडियो, मोबाइल और मंचों पर
जब उनका गीत बजता है,
तो समय थम-सा जाता है।
आज की तारीख हमें याद दिलाती है
कि लता मंगेशकर सिर्फ़ एक गायिका नहीं थीं,
वह भारतीय संस्कृति,
संवेदना और संगीत की आत्मा थीं।
मालवांचल मित्र
स्वर कोकिला को
विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
श्रद्धांजलि।