• प्रेरणादायक कहानी : पंच परमेश्वर

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    प्रेरणादायक कहानी
    सुप्रभात   - नीमच[12-01-2026]
  • गाँव के बाहर पुराने बरगद के पेड़ के नीचे आज पंचायत लगी थी। चारों ओर गाँव के लोग गोल घेरा बनाकर बैठे थे। बीच में चटाई पर पंचगण विराजमान थे। वातावरण शांत था, लेकिन सबकी आँखों में उत्सुकता झलक रही थी।

    झगड़ा दो पुराने मित्रों—हरि और जुम्मन—के बीच था। कभी दोनों एक-दूसरे के बिना खाना तक नहीं खाते थे, लेकिन आज हालात बदल चुके थे। जुम्मन की बूढ़ी खाला ने अपनी जमीन उसके नाम कर दी थी, इस शर्त पर कि वह जीवनभर उनका पालन-पोषण करेगा। शुरू में सब ठीक रहा, पर समय बीतने के साथ जुम्मन और उसकी पत्नी का व्यवहार बदल गया। खाला को ताने मिलने लगे, खाना भी ठीक से नहीं मिलता।


    थक-हारकर खाला ने पंचायत में न्याय माँगा। आज हरि पंच बना था। जुम्मन को भरोसा था कि दोस्ती के कारण फैसला उसके पक्ष में होगा, लेकिन हरि के मन में उथल-पुथल चल रही थी।

    जब फैसला सुनाने का समय आया, हरि उठ खड़ा हुआ। उसने गंभीर स्वर में कहा,
    “आज मैं किसी का मित्र नहीं, केवल पंच हूँ। पंच के लिए न्याय सबसे ऊपर है।”

    उसने खाला के पक्ष में निर्णय सुनाया—जुम्मन या तो खाला का सम्मानपूर्वक पालन करे, या उन्हें हर महीने गुज़ारे के लिए निश्चित धन दे।


    यह सुनते ही जुम्मन की आँखें झुक गईं। उसे समझ आ गया कि सच्चा न्याय क्या होता है। पंचायत समाप्त हुई, लेकिन उस दिन गाँव ने एक बड़ी सीख ली—

    जब इंसान न्याय की गद्दी पर बैठता है, तब वह सच में ‘पंच परमेश्वर’ बन जाता है।



  • प्रेरणादायक कहानी : पंच परमेश्वर

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    प्रेरणादायक कहानी
    सुप्रभात   - नीमच[12-01-2026]

    गाँव के बाहर पुराने बरगद के पेड़ के नीचे आज पंचायत लगी थी। चारों ओर गाँव के लोग गोल घेरा बनाकर बैठे थे। बीच में चटाई पर पंचगण विराजमान थे। वातावरण शांत था, लेकिन सबकी आँखों में उत्सुकता झलक रही थी।

    झगड़ा दो पुराने मित्रों—हरि और जुम्मन—के बीच था। कभी दोनों एक-दूसरे के बिना खाना तक नहीं खाते थे, लेकिन आज हालात बदल चुके थे। जुम्मन की बूढ़ी खाला ने अपनी जमीन उसके नाम कर दी थी, इस शर्त पर कि वह जीवनभर उनका पालन-पोषण करेगा। शुरू में सब ठीक रहा, पर समय बीतने के साथ जुम्मन और उसकी पत्नी का व्यवहार बदल गया। खाला को ताने मिलने लगे, खाना भी ठीक से नहीं मिलता।


    थक-हारकर खाला ने पंचायत में न्याय माँगा। आज हरि पंच बना था। जुम्मन को भरोसा था कि दोस्ती के कारण फैसला उसके पक्ष में होगा, लेकिन हरि के मन में उथल-पुथल चल रही थी।

    जब फैसला सुनाने का समय आया, हरि उठ खड़ा हुआ। उसने गंभीर स्वर में कहा,
    “आज मैं किसी का मित्र नहीं, केवल पंच हूँ। पंच के लिए न्याय सबसे ऊपर है।”

    उसने खाला के पक्ष में निर्णय सुनाया—जुम्मन या तो खाला का सम्मानपूर्वक पालन करे, या उन्हें हर महीने गुज़ारे के लिए निश्चित धन दे।


    यह सुनते ही जुम्मन की आँखें झुक गईं। उसे समझ आ गया कि सच्चा न्याय क्या होता है। पंचायत समाप्त हुई, लेकिन उस दिन गाँव ने एक बड़ी सीख ली—

    जब इंसान न्याय की गद्दी पर बैठता है, तब वह सच में ‘पंच परमेश्वर’ बन जाता है।

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  • प्रेरणादायक कहानी : पंच परमेश्वर

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