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ई-कॉमर्स की दुनिया में भरोसे पर टिके सिस्टम को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। Amazon को एक संगठित “रिफंड स्कैम” के चलते लगभग 4 मिलियन डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। कंपनी की जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक नेटवर्क था, जिसने महंगे प्रोडक्ट्स को निशाना बनाया। कैसे काम करता था यह स्कैम? इस पूरे फ्रॉड का संचालन एक ग्रुप “RBK” द्वारा Telegram के जरिए किया जा रहा था। यह ग्रुप ग्राहकों को “रिफंड सर्विस” ऑफर करता था। प्रक्रिया देखने में आसान लेकिन बेहद खतरनाक थी—
इस पूरी प्रक्रिया को “Social Engineering” कहा जाता है, जिसमें सिस्टम को सीधे हैक करने के बजाय लोगों को गुमराह करके फायदा उठाया जाता है। कमीशन के बदले ‘फुल रिफंड’ RBK इस सेवा के बदले ऑर्डर वैल्यू का 15% से 30% तक कमीशन लेता था। यानी ग्राहक महंगा प्रोडक्ट अपने पास रखता और पूरा पैसा वापस पा लेता—जबकि कंपनी को सीधा नुकसान होता। अंडरकवर जांच से खुला राज मामले की गंभीरता को देखते हुए Amazon ने खुद अंडरकवर जांच की। एक इन्वेस्टिगेटर ने ग्राहक बनकर RBK से संपर्क किया और एक प्रोडक्ट खरीदने के बाद बिटकॉइन में भुगतान किया। इसके बाद उसी तरीके से फर्जी क्लेम किया गया, जिससे स्कैम की पुष्टि हो गई। अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और आरोपी जांच के दौरान कुछ डिजिटल सुरागों के आधार पर एक नाम सामने आया—Dias Temirbekul Zhumaniyaz, जो कथित तौर पर कज़ाकिस्तान से जुड़ा है। इसके अलावा Michael Bauschelt और Adnan Islam के नाम भी सामने आए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने लैपटॉप, ड्रोन और हाई-एंड ग्राफिक्स कार्ड्स जैसे महंगे प्रोडक्ट्स खरीदकर फर्जी रिफंड क्लेम किए। बड़े स्तर पर फैल चुका था नेटवर्क
Amazon की कानूनी कार्रवाई Amazon ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है और मांग की है कि:
कंपनी के अनुसार, इस केस की जांच में ही 75,000 डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। भारत पर क्या असर? इस तरह के स्कैम्स का असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहता। भारत जैसे बड़े ई-कॉमर्स बाजार में, जहां रिफंड सिस्टम “ट्रस्ट” पर आधारित है, ऐसे मामलों के बाद कंपनियां अपनी नीतियां सख्त कर सकती हैं। इसका सीधा असर ईमानदार ग्राहकों पर पड़ेगा—रिफंड प्रक्रिया कठिन और समय लेने वाली हो सकती है। "यह मामला दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसे का दुरुपयोग किस स्तर तक किया जा सकता है। जहां एक ओर टेक्नोलॉजी सुविधा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे संगठित साइबर अपराध नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियों और ग्राहकों दोनों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी।" |
ई-कॉमर्स की दुनिया में भरोसे पर टिके सिस्टम को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। Amazon को एक संगठित “रिफंड स्कैम” के चलते लगभग 4 मिलियन डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। कंपनी की जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक नेटवर्क था, जिसने महंगे प्रोडक्ट्स को निशाना बनाया।
कैसे काम करता था यह स्कैम?
इस पूरे फ्रॉड का संचालन एक ग्रुप “RBK” द्वारा Telegram के जरिए किया जा रहा था। यह ग्रुप ग्राहकों को “रिफंड सर्विस” ऑफर करता था। प्रक्रिया देखने में आसान लेकिन बेहद खतरनाक थी—
यूज़र पहले Amazon से महंगा सामान खरीदता
फिर अपना अकाउंट RBK को एक्सेस दे देता
RBK, कस्टमर बनकर कंपनी से संपर्क करता और दावा करता कि पैकेज खाली मिला या डिलीवर ही नहीं हुआ
दावे को मजबूत बनाने के लिए फर्जी पुलिस रिपोर्ट्स तक तैयार की जाती थीं
इस पूरी प्रक्रिया को “Social Engineering” कहा जाता है, जिसमें सिस्टम को सीधे हैक करने के बजाय लोगों को गुमराह करके फायदा उठाया जाता है।
कमीशन के बदले ‘फुल रिफंड’
RBK इस सेवा के बदले ऑर्डर वैल्यू का 15% से 30% तक कमीशन लेता था। यानी ग्राहक महंगा प्रोडक्ट अपने पास रखता और पूरा पैसा वापस पा लेता—जबकि कंपनी को सीधा नुकसान होता।
अंडरकवर जांच से खुला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए Amazon ने खुद अंडरकवर जांच की। एक इन्वेस्टिगेटर ने ग्राहक बनकर RBK से संपर्क किया और एक प्रोडक्ट खरीदने के बाद बिटकॉइन में भुगतान किया। इसके बाद उसी तरीके से फर्जी क्लेम किया गया, जिससे स्कैम की पुष्टि हो गई।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और आरोपी
जांच के दौरान कुछ डिजिटल सुरागों के आधार पर एक नाम सामने आया—Dias Temirbekul Zhumaniyaz, जो कथित तौर पर कज़ाकिस्तान से जुड़ा है। इसके अलावा Michael Bauschelt और Adnan Islam के नाम भी सामने आए हैं।
इन पर आरोप है कि इन्होंने लैपटॉप, ड्रोन और हाई-एंड ग्राफिक्स कार्ड्स जैसे महंगे प्रोडक्ट्स खरीदकर फर्जी रिफंड क्लेम किए।
बड़े स्तर पर फैल चुका था नेटवर्क
RBK के Telegram चैनल पर 1,000 से अधिक सदस्य
2,100 से ज्यादा फर्जी “वाउच” या टेस्टिमोनियल्स
फरवरी 2023 से अब तक 4 मिलियन डॉलर से ज्यादा के क्लेम
Amazon की कानूनी कार्रवाई
Amazon ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है और मांग की है कि:
पूरा नुकसान वसूला जाए
जांच और कानूनी खर्च की भरपाई हो
भविष्य में ऐसे फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए कोर्ट आदेश दे
कंपनी के अनुसार, इस केस की जांच में ही 75,000 डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।
भारत पर क्या असर?
इस तरह के स्कैम्स का असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहता। भारत जैसे बड़े ई-कॉमर्स बाजार में, जहां रिफंड सिस्टम “ट्रस्ट” पर आधारित है, ऐसे मामलों के बाद कंपनियां अपनी नीतियां सख्त कर सकती हैं। इसका सीधा असर ईमानदार ग्राहकों पर पड़ेगा—रिफंड प्रक्रिया कठिन और समय लेने वाली हो सकती है।
"यह मामला दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसे का दुरुपयोग किस स्तर तक किया जा सकता है। जहां एक ओर टेक्नोलॉजी सुविधा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे संगठित साइबर अपराध नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियों और ग्राहकों दोनों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी।"