• विदेश : इज़राइल का ईरान पर ‘निवारक हमला’, देश में आपातकाल; परमाणु वार्ता जारी

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
    विदेश
    विदेश   - नीमच[28-02-2026]
  • मालवांचल मित्र, यरुशलम/तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने घोषणा की है कि इज़राइल ने ईरान के खिलाफ एक “निवारक हमला” (pre-emptive strike) शुरू किया है। उनके अनुसार यह अभियान संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। सरकार ने पूरे इज़राइल में आपातकाल लागू कर दिया है।

    अब तक ईरान की ओर से इज़राइली क्षेत्र पर मिसाइल दागे जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इज़राइली अधिकारियों ने नागरिकों को निर्दिष्ट सुरक्षित कमरों के पास रहने की सलाह दी है, हालांकि उन्हें अभी अंदर जाने का निर्देश नहीं दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर सतर्क हैं।

    मोसाद का ईरानी जनता से सीधा संवाद

    हमलों के बीच इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर फ़ारसी में एक संदेश जारी कर सीधे ईरानी जनता को संबोधित किया। एजेंसी ने दावा किया कि उसने ईरानियों के लिए एक सुरक्षित और समर्पित डिजिटल मंच तैयार किया है।

    संदेश में कहा गया, “हमारे ईरानी भाइयों और बहनों, आप अकेले नहीं हैं। साथ मिलकर हम ईरान को उसके गौरवशाली दिनों में वापस लाएंगे।” एजेंसी ने ईरान के भीतर के लोगों से शासन के खिलाफ उनके “वैध संघर्ष” से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करने का आह्वान भी किया।

    ट्रंप का रुख: कूटनीति को और समय

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए और समय देने के पक्ष में हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ट्रंप ने वार्ता की प्रगति पर असंतोष जताया, लेकिन तत्काल सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

    जेनेवा वार्ता बेनतीजा, वियना में अगला दौर

    हाल ही में जेनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का दौर बिना ठोस नतीजे के समाप्त हुआ। यह वार्ता बद्र अल-बुसैदी (ओमान) की मध्यस्थता में हुई थी। दोनों पक्ष अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।

    ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्द्धन का अधिकार है, जबकि अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं चाहता है। वार्ता का अगला चरण वियना में प्रस्तावित है।

    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की है। निरीक्षकों की पहुंच को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

    क्षेत्रीय असर और सामरिक गतिविधियां

    सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयानों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

    आगे क्या?

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति अत्यंत संवेदनशील है और किसी भी पक्ष की आक्रामक प्रतिक्रिया से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल निगाहें कूटनीतिक प्रयासों और संभावित जवाबी कदमों पर टिकी हैं।

    मध्य पूर्व की यह ताज़ा उथल-पुथल वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।



  • विदेश : इज़राइल का ईरान पर ‘निवारक हमला’, देश में आपातकाल; परमाणु वार्ता जारी

    PRAVEEN ARONDEKAR   - नीमच
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    विदेश   - नीमच[28-02-2026]

    मालवांचल मित्र, यरुशलम/तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने घोषणा की है कि इज़राइल ने ईरान के खिलाफ एक “निवारक हमला” (pre-emptive strike) शुरू किया है। उनके अनुसार यह अभियान संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। सरकार ने पूरे इज़राइल में आपातकाल लागू कर दिया है।

    अब तक ईरान की ओर से इज़राइली क्षेत्र पर मिसाइल दागे जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इज़राइली अधिकारियों ने नागरिकों को निर्दिष्ट सुरक्षित कमरों के पास रहने की सलाह दी है, हालांकि उन्हें अभी अंदर जाने का निर्देश नहीं दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर सतर्क हैं।

    मोसाद का ईरानी जनता से सीधा संवाद

    हमलों के बीच इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर फ़ारसी में एक संदेश जारी कर सीधे ईरानी जनता को संबोधित किया। एजेंसी ने दावा किया कि उसने ईरानियों के लिए एक सुरक्षित और समर्पित डिजिटल मंच तैयार किया है।

    संदेश में कहा गया, “हमारे ईरानी भाइयों और बहनों, आप अकेले नहीं हैं। साथ मिलकर हम ईरान को उसके गौरवशाली दिनों में वापस लाएंगे।” एजेंसी ने ईरान के भीतर के लोगों से शासन के खिलाफ उनके “वैध संघर्ष” से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करने का आह्वान भी किया।

    ट्रंप का रुख: कूटनीति को और समय

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए और समय देने के पक्ष में हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ट्रंप ने वार्ता की प्रगति पर असंतोष जताया, लेकिन तत्काल सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

    जेनेवा वार्ता बेनतीजा, वियना में अगला दौर

    हाल ही में जेनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का दौर बिना ठोस नतीजे के समाप्त हुआ। यह वार्ता बद्र अल-बुसैदी (ओमान) की मध्यस्थता में हुई थी। दोनों पक्ष अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।

    ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्द्धन का अधिकार है, जबकि अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं चाहता है। वार्ता का अगला चरण वियना में प्रस्तावित है।

    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की है। निरीक्षकों की पहुंच को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

    क्षेत्रीय असर और सामरिक गतिविधियां

    सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयानों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

    आगे क्या?

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति अत्यंत संवेदनशील है और किसी भी पक्ष की आक्रामक प्रतिक्रिया से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल निगाहें कूटनीतिक प्रयासों और संभावित जवाबी कदमों पर टिकी हैं।

    मध्य पूर्व की यह ताज़ा उथल-पुथल वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।